दीप तो जलते है अब घर सजाने के लिए
उजालों के लिए तो खुद को जलाना पड़ेगा
दिल से दिल लगाकर जज्बात जगा सकतें है
कIम के लिए तो खुद को लगाना
पड़ेगा
बहस करने मे कोई हमको हरा सकता नहीं
अब वक़्त है कुछ कIम भी कर
के दिखाना पड़ेगा
हर झूठ हिलाने लगा है देश की बुनियाद को
"मावल" देश की खातिर अब,झूटों को हटाना पड़ेगा