Thursday, 13 February 2014

दीपक



दीप तो जलते है अब घर सजाने के लिए 
उजालों के लिए तो खुद को जलाना पड़ेगा 
दिल से दिल लगाकर जज्बात  जगा सकतें है
Iम के लिए तो खुद को लगाना पड़ेगा 
बहस करने मे कोई हमको हरा सकता नहीं 
अब वक़्त है कुछ कIम भी कर के दिखाना पड़ेगा 
हर झूठ हिलाने लगा है देश की बुनियाद को 
"मावल" देश की खातिर अब,झूटों को हटाना पड़ेगा 

दो कदम



इस अनगिनत भीड़ में तुम दो कदम भी आगे  बढ पाओ तो बहुत होगा
हर तरफ कीचड़ ही कीचड़ है बच के निकल पाओ तो बहुत होगा
हर कोई देखता है शक की नजर से यंहा,किशी से दिल खोल मिल् पाओ तो बहुत होगा
तेरे नाम वाले कितने ही मिल जायेंगे यंहा, तुम अपनी पहचान बन पाओ तो बहुत होगा
कोई फ़िक्र में, कोई लालच में कोई जिम्मेदारी समझकर जी रहा है यंहा
तुम इससे बाहर निकल पाओ तो बहुत होगा
तेरी जिन्दगी तुझ पर कर्ज़ है यंहा किसी का,बस इतना समझ पाओगे तो बहुत होगा.
"मावल"तो योंही उलझ कर रह गया है यंहा, तुम इन उलझनों से बच पाओ तो बहुत होगा.

रिश्ते



रिश्ते तो रिश्ते होते हैं,
चाहत हो तो बन जायेंगेI
रिश्ते कोइ मशीन नहि हैं,
तेल डालकर चल जायेगे.
ये कोइ सामान नहि,
जो बाजारो मे मिल जायेगे.
रिश्ते टाइम पास नहि हैं,
मार ठहाका  निकल जायेगे.
रिश्ते काफी चाय नहि हैं,
जंहा जाओगे मिल जायेगे.
रिश्ते तो सपने होतें हैं
जो रिश्तों का मतलब समझे,
वो ग़ैर नही अपने होते हैं
रिश्ते तो  नन्हे पोधे हैं
उठा पटक में टूट जायेंगे
थोड़ा पानी हवा मिली तो ,
गुलशन जैसे खिल जायेगे.....


वो नही चाहते थे मगर, इन्होने उन्हें नेता बना दिया
इनको उम्मीद भी नही थी, जो उन्होंने कर के दिखा दिया
वो सिर्फ सौ थे, ये दस हजार
फिर भी उन्होंने इनको पहली बार में हरा दिया
उन्होंने क्या पाया क्या खोया ये चर्चा चलती रहेगी
जो सो रहें थे शाशन की कुर्शियों पर , उन सब को जगा दिया
कितने ही रुकने लगे हैं ,अब लाल बत्ती पर
रिमोट चलाने वालों को पैदल चला दिया
ये तो राज नेता है, चाहकर भी उनकी तारीफ कर नही सकते,
उन्होंने आम आदमी को , रास्ता दिखा दिया
वो रहें ना रहें वो अपना कम कर चुके
पब्लिक से नेताओं का कुछ डर हटा दिया,
ये तो शुरुआत भर है मावलमंजिलें अभी बाकीं हैं
पब्लिक को उन्होंने पहरेदार से मिला दिया.