Thursday, 13 February 2014



वो नही चाहते थे मगर, इन्होने उन्हें नेता बना दिया
इनको उम्मीद भी नही थी, जो उन्होंने कर के दिखा दिया
वो सिर्फ सौ थे, ये दस हजार
फिर भी उन्होंने इनको पहली बार में हरा दिया
उन्होंने क्या पाया क्या खोया ये चर्चा चलती रहेगी
जो सो रहें थे शाशन की कुर्शियों पर , उन सब को जगा दिया
कितने ही रुकने लगे हैं ,अब लाल बत्ती पर
रिमोट चलाने वालों को पैदल चला दिया
ये तो राज नेता है, चाहकर भी उनकी तारीफ कर नही सकते,
उन्होंने आम आदमी को , रास्ता दिखा दिया
वो रहें ना रहें वो अपना कम कर चुके
पब्लिक से नेताओं का कुछ डर हटा दिया,
ये तो शुरुआत भर है मावलमंजिलें अभी बाकीं हैं
पब्लिक को उन्होंने पहरेदार से मिला दिया.

No comments:

Post a Comment